दरभंगा आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक निर्माण के कार्य को सुदृढ़ एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से  डीएमसीएच अंतर्गत संचालित “जीविका दीदी की रसोई” में जीविका द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

दरभंगा

आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक निर्माण के कार्य को सुदृढ़ एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से  डीएमसीएच अंतर्गत संचालित “जीविका दीदी की रसोई” में जीविका द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में जिले के सभी प्रखंडों से आए बीपीएम, संबंधित नोडल कर्मियों एवं मास्टर सिलाई दीदियों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान दीदियों को पोशाक निर्माण से जुड़ी तकनीकी जानकारी, सिलाई की सही विधि, कपड़े की कटिंग, माप के अनुसार पोशाक तैयार करने की प्रक्रिया तथा गुणवत्ता मानकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि बच्चों के लिए तैयार की जाने वाली पोशाकें मजबूत, आरामदायक और निर्धारित मानकों के अनुरूप हों, ताकि उनका उपयोग लंबे समय तक किया जा सके।

इस कार्यक्रम में आईबीसीबी प्रबंधक शान्तनु ठाकुर एवं गैर कृषि प्रबंधक अशोक रंजन ने पोशाक निर्माण से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि निर्धारित मानकों के अनुसार पोशाक तैयार करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को बेहतर और उपयोगी पोशाक उपलब्ध कराई जा सके।

राज्य कार्यालय से आए प्रशिक्षकों द्वारा पोशाक निर्माण की पूरी प्रक्रिया का प्रायोगिक प्रदर्शन (डेमो) भी कराया गया, जिससे दीदियों को सिलाई के विभिन्न चरणों की स्पष्ट समझ मिल सके। प्रशिक्षण के दौरान समयबद्ध तरीके से लक्ष्य पूरा करने, कार्य की निगरानी एवं गुणवत्ता नियंत्रण पर भी विशेष जोर दिया गया।

इस अवसर पर जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) डॉ. ऋचा गर्गी ने कहा कि जीविका के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक निर्माण की यह पहल न केवल बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करेगी, बल्कि जीविका दीदियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य मास्टर सिलाई दीदियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है, ताकि वे अपने-अपने प्रखंडों में अन्य दीदियों को प्रशिक्षित कर सकें और पोशाक निर्माण का कार्य निर्धारित मानकों एवं समय-सीमा के भीतर पूरा किया जा सके।

वहीं संचार प्रबंधक राजा सागर ने कहा कि जीविका द्वारा शुरू की गई यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित कर रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए एक जैसी पोशाक उपलब्ध होने से बच्चों के बीच भेदभाव की भावना समाप्त होगी और उनमें समानता का भाव विकसित होगा। उन्होंने बताया कि पोशाक निर्माण का यह कार्य जीविका दीदियों की मेहनत और कौशल का बेहतर उदाहरण है। जीविका के माध्यम से दीदियों को पोशाक सिलाई के लिए सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है तथा प्रखंडवार आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों की संख्या के अनुसार पोशाक निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तैयार की गई प्रत्येक पोशाक के लिए जीविका दीदियों को निर्धारित मानदेय राशि भी प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और वे आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बन सकेंगी।

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