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मनीगाछी प्रखंड के टटुआर पंचायत अंतर्गत विशौल गांव के अति प्राचीन श्री श्री 108 सिद्धेश्वर नाथ मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान प्रवाह

श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान प्रवाह के चौथे दिन श्रीकृष्ण भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया
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मनीगाछी प्रखंड के टटुआर पंचायत अंतर्गत विशौल गांव के अति प्राचीन श्री श्री 108 सिद्धेश्वर नाथ मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान प्रवाह

रिपोर्ट गुड्डू कुमार ठाकुर संवाददाता अजित कुमार सिंह

के चौथे दिन श्रीकृष्ण भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया। कथा वाचन करते हुए डॉ जयप्रकाश चौधरी जनक ने भगवान श्रीहरि द्वारा लिए गए अवतारों की सुंदर व्याख्या की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का सरल एवं सजीव चित्रण करते हुए कहा कि जब पृथ्वी पर आसुरी शक्तियों का प्रकोप चरम पर पहुंचा तो इनके पाप अत्याचारों से व्यथित होकर पृथ्वी ने गोमाता का रुप धारण कर देवताओं को साथ लेकर क्षीरसागर में शयन कर रहे भगवान श्री हरि विष्णु जी की शरण में पहुंचकर अपनी दुर्दशा का वर्णन किया। भगवान श्रीहरि विष्णु ने पृथ्वी की व्यथा सुनकर देवताओं और पृथ्वी को वचन दिया कि वे बृजभूमि में जन्म लेगें और दुराचारियों और असुरों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाएंगें। इसी वचन के अनुसार भगवान श्रीहरि ने वासुदेव व देवकी के यहां करागार में जन्म लिया। भगवान के जन्म की कथा सुनते ही कथा पंडाल में बैठे सभी श्रद्धालुजन उत्साह उमंग खुशी से झूम उठे। भक्तगणों द्वारा काफी हर्षोल्लास से जन्मोत्सव मनाया गया।
महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत आयोजित भक्तिमय सांस्कृतिक संध्या में आकाशवाणी, दरभंगा के गायक केदारनाथ कुमर के गाये सोहर, नचारी एवं महेशवाणी भक्तों के विशेष आकर्षण में रहे। उनके साथ तबला पर मिथुन दास एवं इलेक्ट्रॉनिक बैंजो पर संत कुमार ने संगति दी। कथा ज्ञान प्रवाह में गोता लगाते स्थानीय तथा आसपास के गांवों से आनेवाले भक्तों का उत्साह देखते बनता है। श्री मद् भागवत कथा ज्ञान प्रवाह की यह भक्तिमय रस-धार 25 फरवरी तक बहेगी।

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