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मलमास के अंतिम दिन कमला नदी में उमड़ी आस्था का जनसैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

मलमास के अंतिम दिन कमला नदी में उमड़ी आस्था का जनसैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी

मलमास के अंतिम दिन मधुबनी जिले के जयनगर प्रखंड स्थित प्रसिद्ध कमला नदी घाट पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मिथिलांचल की गंगा के नाम से विख्यात इस पावन घाट पर सोमवार को हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। सुबह से ही घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी, जो अभी तक जारी रही। महिलाओं, पुरुषों तथा बुजुर्गों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ कमला नदी में स्नान कर अपने परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मलमास के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस अवधि में पवित्र नदियों में स्नान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा परिवार में सुख, शांति, धन-वैभव और खुशहाली का आगमन होता है। एक माह तक चले मलमास के समापन के अवसर पर कमला नदी घाट पर विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला।स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने घाट परिसर स्थित विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना भी की। यहां भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, मां कमला, हनुमान जी, भगवान गणेश तथा भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग मंदिर में स्थित हैं। श्रद्धालुओं ने विधिवत दर्शन-पूजन कर अपने परिवार और समाज की खुशहाली की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा क्षेत्र धार्मिक वातावरण से गुंजायमान रहा।स्थानीय समाजसेवी अजय कापर एवं पप्पू पूर्वे ने बताया कि कमला नदी घाट की धार्मिक मान्यता दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मधुबनी जिले के विभिन्न प्रखंडों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की गहरी आस्था है कि मां कमला के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है।मलमास के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय लोगों द्वारा व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया गया। घाट पर श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। पूरे दिन भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा, जिससे कमला नदी घाट एक विशाल धार्मिक केंद्र के रूप में दिखाई दिया।मिथिलांचल की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान मानी जाने वाली कमला नदी में आस्था की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। मलमास के अंतिम दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर इस पवित्र स्थल की महत्ता को उजागर किया।

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