अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर दरभंगा में 11 जीविका दीदियाँ सम्मानित, डीएम ने सराहा महिलाओं का नेतृत्व
महिला सशक्तिकरण में जीविका सबसे आगे : डीएम कौशल कुमार
सम्मान से खिल उठे जीविका दीदियों के चेहरे, बढ़ा आत्मविश्वास

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन दरभंगा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 11 जीविका दीदियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी महोदय श्री कौशल कुमार ने इन महिलाओं को सम्मानित करते हुए उनके कार्यों की सराहना की और कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की नई मिसाल कायम कर रही हैं।
अपने संबोधन में जिलाधिकारी ने कहा कि आज बिहार में विकास और सामाजिक परिवर्तन के किसी भी कार्य में जीविका दीदियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि “जीविका दीदियों के बिना बिहार में अब कोई भी बड़ा काम पूरा नहीं हो पाता। महिला सशक्तिकरण की बात जब भी होती है, तो सबसे पहले जीविका का नाम सामने आता है।” उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।
इस मौके पर डीपीएम डा० ऋचा गार्गी ने कहा कि जीविका के माध्यम से जिले की लाखों महिलाएं आज आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं। उन्होंने सम्मानित जीविका दीदियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और लगन अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और इससे समाज में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
कार्यक्रम में सम्मानित की गई महिलाओं ने आजीविका संवर्धन, वित्तीय समावेशन, उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक नेतृत्व जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
चकवा भरवारी पंचायत, बहेरी प्रखंड की सुनीता देवी को संकुल संघ की अध्यक्ष के रूप में उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया। नरसरा पंचायत, हनुमान नगर प्रखंड की अंजली कुमारी ने बैंक सखी के रूप में ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में सराहनीय कार्य किया है। घोषरामा पंचायत, हायाघाट प्रखंड की पूनम झा ने दीदी अधिकार केंद्र के समन्वयक के रूप में ग्रामीण महिलाओं को उनके कानूनी व सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं का एक छत के नीचे समाधान (परामर्श, कानूनी सहायता, पुनर्वास) प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं, रामपुरा पंचायत, सिंहवाड़ा प्रखंड की बबीता कुमारी ने बैग निर्माण समूह के माध्यम से महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है। पोहद्दी पंचायत, बेनीपुर प्रखंड की फुल देवी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत स्वरोजगार की शुरुआत कर सफल उद्यमिता का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
शेरपुर नारायणपुर पंचायत, तारडीह प्रखंड की आरती कुमारी ने संकुल संघ में लेखा-जोखा रखने के कार्य को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जोगियारी पंचायत, जाले प्रखंड की जुली देवी ने “दीदी की नर्सरी” के माध्यम से पौध उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया है।
कबीरचक पंचायत, दरभंगा सदर की अंजली कुमारी ने “दीदी की रसोई” के माध्यम से स्वरोजगार का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। सोनकी पंचायत की सोना देवी ने हाउसकीपिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है।
पीरी पंचायत, बहादुरपुर प्रखंड की ममता देवी पुलिस लाइन कैंटीन के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वहीं बलौर पंचायत, मनीगाछी प्रखंड की मंजू देवी संकुल संघ की सचिव के रूप में संगठन को मजबूत बनाने में सक्रिय योगदान दे रही हैं।
सम्मान प्राप्त करने के बाद पुरस्कृत जीविका दीदियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। इस अवसर पर जीविका दीदी पूनम झा ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि जिलाधिकारी के हाथों सम्मान प्राप्त करना उनके लिए गर्व और प्रेरणा की बात है। उन्होंने बताया कि इस सम्मान से सभी दीदियाँ बेहद खुश हैं और इससे उन्हें आगे और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे और अधिक मेहनत और जिम्मेदारी के साथ काम करेंगी तथा अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा के साथ निभाते हुए अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।
इस अवसर पर जिले के सभी प्रखंडों के सामुदायिक संगठनों में भी बेहद उत्साह और उमंग के साथ महिला दिवस मनाया गया। विभिन्न स्थानों पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली जीविका दीदियों को सम्मानित किया गया। सामुदायिक संगठनों द्वारा रंगोली, मेहंदी, गोष्ठी, परिचर्चा, सामाजिक बुराइयों के खिलाफ शपथ तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से महिलाओं को सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया गया।
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