मां श्यामा महोत्सव का आज दूसरा दिन
विद्वत गोष्ठी से जीवंत होगी शास्त्रार्थ की परंपरा-प्रो.देवनारायण झा

संस्कृत भारत की आत्मा है।सभी आगत-अतिथियों वक्ताओं ने न्यास समिति से संस्कृत के प्रचार-प्रसार गुरुकुल परंपरा तथा शास्त्रार्थ परंपरा को जीवंत करने के लिए समवेत रूप से मांग की।अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए न्यास समिति के उपाध्यक्ष प्रो.जयशंकर झा ने कहा कि माँ श्यामा की कृपा होते ही सबों में करुणा का संचार होता है।साथ ही उन्होंने वक्ताओं की ओर से आए संस्कृत की मांगों के लिए अगली न्यास समिति की बैठक में प्रमुखता से रखने का वचन दिया।विद्वत गोष्ठी में भाग लेने वाले विद्वान क्रमशः कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति द्वय क्रमशः डॉ.देवनारायण झा, डॉ.शशिनाथ झा,डॉ.दिलीप झा,डॉ.राजेश्वर पासवान,डॉ.सुरेश्वर झा,डॉ.दयानाथ झा,प्रो.वीरेंद्र नारायण सिंह,डॉ.श्रीपति त्रिपाठी,डॉ.दिलीप कुमार झा,डॉ.बौआनंद झा,डॉ.संजीत झा सरस,प्रमोद कुमार गुप्ता,डॉ.पुरेंद्र वारिक,डॉ.संतोष कुमार पासवान रहे।विद्वत गोष्ठी की अध्यक्षता माँ श्यामा मन्दिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष प्रो.जयशंकर झा ने किया।मौके पर इंद्रनाथ झा द्वारा लिखित दो पुस्तक क्रमशः श्री सत्यनारायण पूजा पद्धति तथा मातृका पूजा व अभ्युदयिक श्राद्ध पद्धति का उपस्थित आगत-अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।सत्र का संचालन डॉ.अमलेंदु शेखर पाठक ने जबकि संयोजन डॉ.मित्रनाथ झा ने किया।मौके पर न्यास समिति के अध्यक्ष डॉ.एस.एम.झा,उपाध्यक्ष कमलाकांत झा,न्यासी सदस्य अरुण गिरी,अपर समाहर्ता सलीम अख्तर,जिला कला संस्कृति अधिकारी चंदन कुमार,वाणेश्वरी न्यास समिति के सचिव संजीव कुमार झा,न्यास समिति के पूर्व प्रबंधक चौधरी हेमचंद्र राय,मुनींद्र मिश्र सहित आयोजन समिति से जुड़े राकेश झा,उज्ज्वल कुमार आदि मौजूद थे।
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